नमक के प्रकार एव्ं उनके के बारे में
1. सादा नमक/ आयोडीन युक्त/सफेद नमक (Table Salt)
सामान्य सफेद नमक मुख्य रूप से सोडियम क्लोराइड होता है खाना पकाते समय इस नमक का कम इस्तेमाल किया जाता है इसे खाने या सलाद के ऊपर से नहीं डालना चाहिए यानी बिना पका नहीं खाए
- स्रोत: इसे जमीन के अंदर मौजूद नमक की खदानों से निकाला जाता है।
- विशेषता: इसे बारीक पीसा जाता है और इसमें आयोडीन मिलाया जाता है (थायराइड से बचाव के लिए)।
- उपयोग: यह रोजमर्रा के खाना पकाने और बेकिंग में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है।
2. सेंधा नमक (Rock Salt / Pink Himalayan Salt)
सेंधा नमक व्रत के भोजन के अलावा फल, सलाद पर से डाल सकते हैं भोजन पकाते समय भी उपयोग कर सकते हैं परंतु केवल सेंधा नमक का सेवन स्वास्थ्य के लिए लाभदायक नहीं है
- स्रोत: यह मुख्य रूप से हिमालय की पहाड़ियों (जैसे पाकिस्तान के खेवड़ा क्षेत्र) से आता है।
- विशेषता: इसमें आयरन ऑक्साइड के कारण इसका रंग हल्का गुलाबी होता है। इसमें कैल्शियम और पोटैशियम जैसे खनिज होते हैं।
- उपयोग: भारत में इसे व्रत (उपवास) के दौरान खाया जाता है। इसे सेहत के लिए सादे नमक से बेहतर माना जाता है।
3. काला नमक (Black Salt / Kala Namak)
काला नमक खट्टा चटपटा स्वाद बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है इसे सलाद फल, चाट्ट, रायता और नींबू पानी में उपयोग कर सकते हैं इसके अलावा काले नमक का इस्तेमाल पाचन सुधारने में भी होता है
- स्रोत: यह एक प्रकार का खनिज नमक है, जिसे भट्टी में मसालों और जड़ी-बूटियों के साथ प्रोसेस किया जाता है।
- विशेषता: इसमें सल्फर की मौजूदगी के कारण एक खास तीखी महक (अंडे जैसी) और स्वाद होता है।
- उपयोग: यह पाचन के लिए बेहतरीन है। इसका उपयोग चाट, रायता, पानीपूरी और सलाद में स्वाद बढ़ाने के लिए किया जाता है।
- स्रोत: यह समुद्र के पानी को वाष्पीकृत (evaporate) करके बनाया जाता है।
- विशेषता: यह सादे नमक से कम रिफाइंड होता है, इसलिए इसके दाने थोड़े बड़े और दरदरे होते हैं।
- उपयोग: इसका उपयोग भोजन पकने के बाद ऊपर से छिड़कने (Finishing salt) या सी-फूड बनाने में किया जाता है।
- स्रोत: यह भी एक प्रकार का जमीनी या समुद्री नमक है, लेकिन इसे रिफाइन अलग तरह से किया जाता है।
- विशेषता: इसके दाने बड़े, चपटे और परतदार होते हैं। इसमें आयोडीन नहीं होता।
- उपयोग: शेफ लोग इसे पसंद करते हैं क्योंकि इसे हाथ से छिड़कना और मात्रा को नियंत्रित करना आसान होता है। इसका उपयोग मीट से खून सुखाने (Koshering process) में भी होता है।






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